
संघर्ष से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से जनसेवा
06 दिसंबर 1990 को जन्मे संजीव मिश्रा “फंटन” का जीवन कम उम्र में आई पारिवारिक जिम्मेदारियों से शुरू होकर परिश्रम, शिक्षा, व्यवसाय, सामाजिक सहयोग और व्यापक जनसंपर्क तक पहुंचा है।
चालक के रूप में काम करने से लेकर ठेकेदारी और संपत्ति-सम्बन्धी कार्यों तक की व्यावसायिक यात्रा ने आत्मनिर्भरता दी। उसी आत्मनिर्भरता के साथ जरूरतमंद परिवारों, बच्चों, मरीजों, महिलाओं और स्थानीय समुदायों के लिए सहयोग का दायरा बढ़ता गया।
ज़रूरतमंद लोगों तक विभिन्न रूपों में सहायता
परिवारों से प्रत्यक्ष जनसंपर्क
आजीविका और पढ़ाई को साथ लेकर चलने का दौर
जनहित और संगठनात्मक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव
जिसने कठिन समय देखा, उसने दूसरों के कठिन समय में साथ देना सीखा
बड़े भाई की दुर्घटना में मृत्यु और उसके बाद पिता के निधन ने कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी सामने रख दी। इसी दौर ने श्रम की गरिमा, आत्मनिर्भरता और जरूरत के समय साथ खड़े होने की अहमियत को जीवन का स्थायी हिस्सा बनाया।

जनसेवा का विस्तार परिवार से समुदाय तक
सहायता किसी एक प्रकार की नहीं रही। परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा, उपचार, विवाह, आवास, दैनिक जरूरतों और स्थानीय समस्याओं तक अलग-अलग रूपों में सहयोग किया गया।

ज़रूरतमंद परिवार
आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के समय यथाशक्ति सहयोग।

इलाज और चिकित्सा
बीमारी, अस्पताल और उपचार से जुड़ी परिस्थितियों में सहायता।

बच्चों की पढ़ाई
शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का सहयोग।

आवास और बुनियादी जरूरतें
ज़रूरतमंद परिवारों के घर और आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग।
लोगों के बीच मौजूदगी ही सार्वजनिक पहचान की असली जमीन
ग्रामसभाओं, सामाजिक कार्यक्रमों, युवा संवाद, स्थानीय बैठकों और जरूरतमंद परिवारों से मुलाकातों की तस्वीरें इस यात्रा का सबसे सजीव दस्तावेज हैं।



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व्यक्तिगत सहायता से आगे बढ़कर स्थानीय समस्याओं और सामुदायिक प्रश्नों पर भी सक्रिय भूमिका।
जहां संवाद की जरूरत रही वहां संवाद, जहां प्रतिनिधित्व जरूरी रहा वहां प्रतिनिधित्व, और जहां लोगों की आवाज को मजबूती से उठाने की आवश्यकता हुई वहां लोकतांत्रिक तरीके से सक्रियता दिखाई गई।
सार्वजनिक जीवनहाल की गतिविधियां और जनसंपर्क की झलकियां
समाज के बीच निरंतर उपस्थिति को तस्वीरों, कार्यक्रमों और सार्वजनिक सहभागिता की क्रमवार झलकियों के माध्यम से देखा जा सकता है।
















हर दिन,
लोगों के बीच।
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Sanjeev Mishra Fantan
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